श्रीराज राजेश्वर मंदिर में ग्रहण काल में सुंदर कार्य करने की पच्चीस वर्षों से परंपरा रही है।
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श्रीराज राजेश्वर मंदिर में ग्रहण काल में सुंदर कार्य करने की पच्चीस वर्षों से परंपरा रही है। 03/03/2026 को सायं चंद्र ग्रहण के दौरान राज राजेश्वर मंदिर आरती मंडल द्वारा हरिनाम व ॐ नमः शिवाय के जाप के साथ संगीतमय सुंदर कांड पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सार्वजनिक सुंदर कांड में सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। सुंदर कांड पाठ में मुख्य गायक कीर्तनकार पं. थे। श्री श्याम शर्मा के मार्गदर्शन में गायक श्री देवेंद्र तिवारी, श्री अतुल जोशी, योगेश कस्तूरे,बंटी चौरसिया, ढोल वादक नितिन गायकवाड़, ऑर्गन वादक राहुल पवन मारे और गायक दीपक उर्फ भट्टू तिवारी, अनिल नृपनारायण व बंटी जोशी कमलेश वर्मा, मनीष वर्मा, दिलीप वानखड़े ने सुंदरकांड गायन में भाग लिया। कार्यक्रमको आयोजित करने वाले आरती मंडल के सदस्य राजू चालसे, महादेव भोंबले, गोपाल मांडेकर, सचिन भीराड, प्रभाकर भोंबले, दिलीप मोयल, संजय शर्मा, संजय जसनपुरे उसी प्रकार राज राजेश्वर ट्रस्ट के विश्वस्त श्री ठाकरे साहेब, गिरीश जी देशपांडे, नरेश जी लोहिया इन्होंने गायकों का स्वागत सत्कार किया और दिलीप जी नायसे, श्रीराम भक्त, प्रमोद दान्दले, गजुभाऊ ठाकुर,ने कार्यक्रम मे उपस्थित रहकर परिश्रम किया.
सुंदरकांड व हनुमान चालीसा और नाम जाप के बाद, सभी ने राज राजेश्वर मंदिर में स्नान किया, राज राजेश्वर मंदिर के कपाट खोले, पूरे मंदिर की सफाई की, राज राजेश्वर मंदिर के शिवलिंग का अभिषेक करके आरती और पूजा की।
राजेश्वर आरती मंडल के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्री चालसे काका ने और आरती मंडल ने मिलकर यह पिछले पच्चीस साल पहले से ग्रहण काल में यह सुंदरकांड और नामजप शुरू किया था। रामचरितमानस के पांचवें अध्याय सुंदरकांड का पाठ अकोला शहर ही नहीं, बल्कि राज राजेश्वर दरबार सुंदरकांड मंडल संपूर्ण भारत मे पिछले 33 सालों से निस्वार्थ सेवा दे रहा है। अकोला में पंडित कीर्तनकार श्याम शर्मा के मार्गदर्शन में सुंदरकांड गाना सीखकर अकोला शहरों में कई मंडल बन गए हैं और अलग-अलग जगहों पर सुंदर कांड कर रहे हैं, राम नाम का जाप कर रहे हैं और सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। श्री श्याम शर्मा खुद पुलिस डिपार्टमेंट में पुलिस सब-इंस्पेक्टर के पद पर काम कर रहे हैं और निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। श्याम शर्मा ने सुंदरकांड कीर्तन सुनाते हुए कहा कि रामचरितमानस में शिव और पार्वती का संवाद है और तुलसीदासी ने कहा है कि भगवान ने इस विश्व को “कर्मप्रधान” बनाया है, “कर्मप्रधान विश्व करि राखा” इसलिए सभी को कर्म नहीं छोड़ना चाहिए और कर्म करते रहना चाहिए। कर्म करने से ही यह देश आगे बढ़ेगा।